आईएएस रिंकू सिंह राही के पत्र से मचा बवाल; डीएम, जल शक्ति मंत्री और सिस्टम पर लगाए गंभीर आरोप


जालौन में फील्ड तैनाती से हटाए गए आईएएस रिंकू सिंह राही ने शासन को पत्र भेजा है। उन्होंने उपयुक्त तैनाती न मिलने तक आधा वेतन देने की बात कही। डीएम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। आगे पढ़ें पूरी खबर...
यूपी संवर्ग के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने शासन को पत्र भेजकर हलचल मचा दी है। इसमें उन्होंने जालौन के डीएम की कार्यप्रणाली के साथ ही जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही फील्ड में उपयुक्त तैनाती न मिलने तक आधा दिवस कार्य के बदले आधा ही वेतन दिए जाने का अनुरोध किया है।
रिंकू सिंह राही ने प्रमुख सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक को भेजे पत्र में कहा है कि मसूरी में प्रशिक्षण के बाद शाहजहांपुर की घटना के कारण उन्हें एक वर्ष राजस्व परिषद से संबद्ध रखा गया। उन्होंने नो वर्क-नो पे के सिद्धांत को अमल में लाने और उन्हें समाज कल्याण विभाग की अपनी पुरानी सेवा में वापस भेजे जाने को लेकर तकनीकी त्यागपत्र दिया, जिसके बाद जालौन में तैनाती मिली।
अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकने का आदेश
उन्होंने जालौन के जिलाधिकारी के यहां दिखावे का जनता दर्शन आयोजित करने का आरोप भी लगाया। साथ ही आईजीआरएस और एंटी भू-माफिया संदर्भों का फर्जी निस्तारण स्वीकृत करने का दबाव बनाने की बात कही। पत्र के अनुसार, जिलाधिकारी ने उन्हें एक विधायक के सामने अवैध कब्जों पर कार्रवाई रोकने का आदेश दिया। राही आगे लिखते हैं कि अवैध खनन की उनकी जांच को भी स्थान लीक कर इसे विफल किया गया। साथ ही इन विवादों के बीच उनका तबादला उपजिलाधिकारी, जलौन पद से हटाकर उपजिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर हड़बड़ी में कर दिया गया।
राही ने शासन से अनुरोध किया है कि यदि उनसे कोई त्रुटि हुई है, तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह क्षेत्र में कार्य करने के अवसर मिलें। इसके लिए जिलाधिकारी जालौन को किसी तहसील में उपजिलाधिकारी पद पर तैनात करने का निर्देश दिया जाए। वैकल्पिक रूप से उन्हें ऐसी तहसील में तैनाती दी जाए, जहां सुप्रशासन लागू करने पर कोई आपत्ति न हो। उन्होंने पुनः उनका संवर्ग परिवर्तन की अनुमति देने का विकल्प भी रखा है।
पत्र में स्वतंत्र देव का भी जिक्र किया
राही ने अपने पत्र में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम के दुरुपयोग का भी उल्लेख किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जालौन नगर में मंत्री के नाम का प्रयोग कर अवैध कब्जे की जांच रोकने का षड्यंत्र रचा गया। मंत्री के तथाकथित संबंधी रामराजा निरंजन के शीतगृह की जांच में भी विवाद खड़ा किया गया। राजनीतिक दबाव के चलते जांच रिपोर्ट आने से पहले ही उनका तबादला न्यायिक पद पर कर दिया गया।

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