कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और जीरो एक्सीडेंट लक्ष्य के साथ संपन्न कराने के लिए पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी, अपराधियों पर कार्रवाई, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
डीजीपी राजीव कृष्णा ने कांवड़ यात्रा को जीरो एक्सीडेंट के लक्ष्य के साथ संपन्न कराने का निर्देश दिया। मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उन्होंने आगामी त्योहारों, कांवड़ यात्रा, अपराध नियंत्रण, यक्ष ऐप, लंबित विवेचनाओं और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और दिशा-निर्देश दिए।
डीजीपी ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर निगरानी बढ़ाएं। सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने हेतु स्थानीय स्तर पर समन्वय और निरोधात्मक कार्रवाई करें। बीट सूचना तंत्र को मजबूत कर सक्रिय अपराधियों का शत-प्रतिशत सत्यापन करें। लापता अपराधियों की तलाश हेतु एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाएं। हत्या, डकैती, लूट जैसे जघन्य अपराधों के लंबित प्रकरणों का शीघ्र खुलासा करें।
सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर और गुंडा एक्ट जैसी वैधानिक कार्रवाई करें। थानों पर खड़े वाहनों के निस्तारण हेतु सभी जिलों एवं कमिश्नरेट में डंपिंग यार्ड बनवाए जाएं। सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखें और भ्रामक पोस्ट पर विधिक कार्रवाई करें। गुमशुदा बच्चों की तलाश हेतु अभियान चलाकर उनकी सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करें।
15 दिन पहले मिलेगा अलर्ट
तकनीकी सेवा मुख्यालय ने 60 और 90 दिवस से अधिक लंबित विवेचनाओं की निगरानी के लिए केस डायरी मॉनीटरिंग डैशबोर्ड पोर्टल विकसित किया है। औरैया के एसपी अभिषेक भारती की पहल पर यह विकसित किया गया है, जिसका आईजी आशीष तिवारी ने प्रस्तुतीकरण दिया। यह पोर्टल पर्यवेक्षक अधिकारियों को लंबित विवेचनाओं के संबंध में 15 दिन पूर्व अलर्ट देगा। इससे समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण संभव होगा।
800 से अधिक लोगों की बची जान
बैठक में बताया गया कि मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना से महिला संबंधी अपराधों में कमी आई है। दहेज हत्या में करीब 43 फीसदी और दहेज प्रताड़ना में करीब 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई। वहीं 1 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक सड़क दुर्घटनाओं में 9 फीसदी कमी आई है। मृत्यु दर में 10 फीसदी की कमी हुई है, जिससे 800 से अधिक मानव जीवन की रक्षा हुई। डीजीपी ने अभियानों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।