अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट की अदालत ने वर्ष 1997 के एक मामले में आरोपी दयाराम को दोषमुक्त कर दिया। यह मामला मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और एससी/एसटी एक्ट से संबंधित था। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए यह निर्णय सुनाया।
यह प्रकरण जैतपुर से जुड़ा था। वादी श्रीराम धरिकार ने आरोप लगाया था कि 30 मई 1997 को रामलौट, दयाराम और मंशाराम ने उनके साथ मारपीट की थी। जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। यह विवाद एससी-एसटी आबादी की पट्टा भूमि पर कब्जे को लेकर हुआ था। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
विचारण की प्रक्रिया के दौरान सह-आरोपी रामलौट और मंशाराम की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त हो गई। इसके अतिरिक्त, वादी श्रीराम धरिकार और अन्य प्रमुख गवाहों की भी सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई। इन मौतों ने अभियोजन पक्ष के लिए चुनौती खड़ी कर दी। अदालत में अभियोजन की ओर से पेश किए गए दोनों प्रत्यक्षदर्शी गवाह वंशराज और धर्मराज अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। दोनों ने न्यायालय में स्पष्ट कहा कि उन्होंने घटना नहीं देखी और न ही पुलिस को ऐसा कोई बयान दिया था।