30 जुलाई से श्रावण मास का शुभारंभ, तैयारी तेज


आलापुर। भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होगा। इसकी शुरुआत आयुष्मान योग में होने से धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बढ़ गया है। यह संयोग पूजा-पाठ, व्रत, जप और रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य आशुतोष शुक्ला ने बताया कि आयुष्मान योग शुभ और कल्याणकारी होता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं। सावन की शुरुआत इसी योग में होने से भगवान शिव की पूजा-अर्चना का महत्व बढ़ जाता है। रुद्राभिषेक और व्रत भी अधिक फलदायी होंगे। श्रावण मास का पहला दिन बृहस्पतिवार को पड़ रहा है। इससे हरि (विष्णु) और हर (शिव) दोनों की आराधना का विशेष संयोग बन रहा है। बृहस्पतिवार भगवान विष्णु को समर्पित है, जबकि सावन शिव की उपासना का प्रमुख महीना है। यह संयोग विवाह, शिक्षा, संतान, रोजगार और गुरु ग्रह से जुड़े विषयों में पूजा के लिए अनुकूल है। श्रद्धालु पहले दिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे।

श्रद्धालु शिव मंदिरों में दुग्धाभिषेक और पंचामृत से रुद्राभिषेक करेंगे। भगवान शिव को जल, दूध, पंचामृत और गंगाजल अर्पित किया जाएगा। शहद, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और भांग भी चढ़ाए जाएंगे। सफेद चंदन और मौसमी फल भी अर्पित करने का विधान है। पूजा के दौरान ॐ नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप किया जाएगा।

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