दिलीप की मड़ैया में कटान, तीन मकान गंगा में समाए


फर्रुखाबाद। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दिलीप की मड़ैया गांव में कटान तेज हो गया है। सोमवार से मंगलवार दोपहर तक तीन ग्रामीणों के मकान गंगा में समा गए। जलस्तर चेतावनी बिंदु से मात्र 50 सेंटीमीटर नीचे है, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।
गंगा का जलस्तर मंगलवार सुबह 10 सेंटीमीटर बढ़कर 136.10 मीटर पर पहुंच गया। यह चेतावनी बिंदु से 50 सेंटीमीटर दूर है। हरिद्वार से 43,354 क्यूसेक, बिजनौर से 52,709 क्यूसेक और नरौरा बांध से 68,957 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी में खो हरेली रामनगर बैराज से भी 4,645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका है। पिछले साल बाढ़ से बचे मकानों को बचाने के लिए प्रशासन ने करीब 20 परकोपाइन बनाई थीं। हालांकि, इस बार पानी की धार पश्चिम के बजाय पूर्व दिशा से उल्टा कटान कर रही है। गांव के अखिलेश वर्मा ने बताया कि जितेंद्र कुमार, रुप्पन और होतेलाल के मकानों का अधिकांश हिस्सा गंगा में समा गया है। होतेलाल ने कहा कि उनके मकान की बची हुई दीवारें तोड़कर ईंटें बिलावलपुर में पहुंचाई जा रही हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
पिछले वर्ष गंगा की बाढ़ से पश्चिम दिशा से कटान हो रहा था। तब प्रशासन ने 15-20 मकानों को बचाने के लिए 20 परकोपाइन का निर्माण कराया था। इस बार पानी की तेज धार परकोपाइन से सीधे न टकराकर पूर्व दिशा से कटान कर रही है। यह उल्टा कटान ग्रामीणों के लिए नई समस्या बन गया है।
वर्जन
जितेंद्र के मकान का बचा हुआ हिस्सा गंगा में कट गया है। दावा किया कि केवल एक ही मकान कटा है। बुधवार सुबह फिर गांव का दौरा करेंगे। कुछ ग्रामीण अपने मकानों की ईंटें निकाल रहे हैं। -रामवरन, लेखपाल दिलीप की मड़ैया

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