UP: चीख इंसान ने सुनी दर्द बेजुबान ने समझा, बस्ती में घूमने वाले कुत्ते ने निभाया साथ; दरिंदगी कर बेटी को मारा


गाजियाबाद में अपहरण के बाद मासूम से दरिंदगी और हत्या के मामले में कुत्ते ने पीड़ित परिवार का दर्द समझा। परिजनों ने बताया कि सुरक्षाकर्मी की लापरवाही के बीच बस्ती में घूमने वाले कुत्ते ने साथ निभाया। कुत्ते की निशानदेही पर बच्ची का शव मिला।
गाजियाबाद में निर्माणाधीन मॉल में मासूम के साथ हुई दरिंदगी की चीखें सिर्फ दीवारों ने ही नहीं सुनीं। वहां मौजूद एक सुरक्षाकर्मी भी उसको चीत्कार का गवाह बना, लेकिन उसने सब कुछ सामान्य समझकर हालात को नजरअंदाज कर दिया। वह सिर गड़ाए अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहा।
दूसरी ओर एक ऐसा जीव था जो बोल नहीं सकता था, लेकिन पीड़ित परिवार का दर्द समझ गया। वह बस्ती में घूमने वाला बेसहारा कुत्ता था, जिसे पीड़ित परिवार ने कभी-कभार रोटी खिलाई थी। परिवार के सबसे मुश्किल वक्त में वह हर पल उनके साथ रहा और जब मासूम की खोजबीन करके सब थक गए तो उसके शय तक पहुंचाया।
नंदग्राम क्षेत्र में शुक्रवार रात सामूहिक दरिंगदी की शिकार हुई बच्ची के पिता बताते हैं कि आरोपी उनकी बेटी को सुरक्षाकर्मी के सामने से निर्माणाधीन मॉल के भीतर ले गए थे। पूछताछ में सुरक्षाकर्मी ने खुद माना कि उसने बच्ची को चीख-पुकार भी सुनी थी, लेकिन उसे कोई असामान्य बात नहीं लगी। उसने न तो मौके पर जाकर देखा और न ही बाद में बच्ची की तलाश में जुटे परिवार की मदद की।
मासूम की खोजबीन के दौरान परिवार के लिए हर बीतता पल उम्मीद और बेचैनी के बीच झूल रहा था। रात गहराती जा रही थी और बेटी का कहीं पता नहीं था। उस दौरान एक बेसहारा कुत्ता लगातार उनके साथ बना रहा। वह कभी आगे चलता, कभी लौटकर परिवार के आसपास मंडराता। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि वह उन्हें किसी सच तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
पीड़ित पिता बताते हैं कि रात करीब 11 बजे जब वह लगभग हार मान चुके थे, तभी कुत्ता जोर-जोर से भौंकते हुए बेसमेंट की ओर दौड़ा। परिवार उसके पीछे गया तो वहीं बच्ची का शव पड़ा मिला। इसके बाद भी वह काफी देर तक शव के पास बैठा रहा, जैसे किसी अपने की रखवाली कर रहा हो। उस मंजर को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गई।
इस घटना में कुत्ते की भूमिका को देख बच्ची के परिवार के मुंह से यही निकला कि एक इंसान अपनी जिम्मेदारी भूल गया और बेजुबान ने इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल पेश कर दी। परिवार का कहना है कि वे उसे कभी-कभार रोटी खिला दिया करते थे। शायद वह उसी अपनेपन का कर्ज चुका रहा था। 
 सुरक्षा पुख्ता होती तो जिंदा होती बेटी
पूरा घटनाक्रम पता चलने के बाद झुग्गियों में रहने वाले लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा। रविवार तड़के लोगों ने आक्रोश में सुरक्षाकर्मी की पिटाई भी कर दी। उनका कहना था कि यदि सुरक्षाकर्मी चीख सुनते ही सक्रिय हो जाता या बच्ची को ले जाते लोगों से पूछताछ कर लेता तो शायद परिवार उजड़ने से बच जाता। पीड़ित परिवार भी बार-बार यही दोहरा रहा है कि चीखों को किसी ने गंभीरता से सुन लिया होता तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।
 75 साल के बुजुर्ग के सहारे हो रही सुरक्षा
इस दर्दनाक घटना ने निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये की परियोजना की सुरक्षा 75 वर्षीय बुजुर्ग सुरक्षाकर्मी के भरोसे चल रही है। परिसर में सीमित स्थानों पर ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और दोनों ओर के गेट से कोई भी बिना रोक-टोक प्रवेश कर सकता है। घटना वाली रात निर्माण कार्य बंद था, फिर भी सुरक्षाकर्मी ने आरोपियों को भीतर जाने से रोकने की जरूरत नहीं समझी।

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