आज से बंद होंगे शुभ कार्य: शहनाइयों पर लगा विराम, 23 तक गुप्त नवरात्र; यहां देखें साल के आखिरी विवाह मुहूर्त


गुरु ग्रह के अस्त होने और भगवान विष्णु के शयनकाल चातुर्मास के आरंभ के चलते शादी-विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह समय पूजा-पाठ, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद नवंबर के अंत से फिर शहनाइयां गूंजेंगी।
शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों पर अब विराम लग गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, 15 जुलाई से गुरु ग्रह के अस्त होने और 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू होने के कारण अगले चार महीनों तक शादियों और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इसके बाद शहनाइयों की गूंज सीधे 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुरु ग्रह 15 जुलाई से अस्त हो जाएंगे और 12 अगस्त को वापस उदय होगा। हालांकि इसके बाद भी विवाह नहीं हो सकेंगे, क्योंकि 25 जुलाई से भगवान विष्णु के शयनकाल अर्थात चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा। मान्यता है कि इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जगने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। ऐसे में नवंबर के अंतिम सप्ताह से विवाह समारोहों की रौनक लौटने की संभावना है। वहीं, 16 दिसंबर से खरमास शुरू होने के साथ मांगलिक कार्यों पर फिर विराम लग जाएगा।
ज्योतिषाचार्य अनिता पाराशर ने बताया कि चतुर्मास को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं विवाह के लिए देवोत्थान एकादशी के बाद मिलने वाले शुभ मुहूर्तों का इंतजार करना होगा।
महत्वपूर्ण तिथियां
15 जुलाई : गुरु अस्त
25 जुलाई : देवशयनी एकादशी, चतुर्मास प्रारंभ
12 अगस्त : गुरु उदय
20 नवंबर : देवोत्थान एकादशी, चतुर्मास समाप्त
16 दिसंबर : खरमास प्रारंभ, मांगलिक कार्यों पर विराम
साल के आखिरी विवाह मुहूर्त
नवंबर -21, 24, 25 और 26 दिसंबर 2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12
गुप्त नवरात्र आज से 23 तक
आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहे हैं जो 23 जुलाई तक चलेंगे। इन 9 दिनों में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य अनिता पाराशर ने बताया कि आषाढ़ गुप्त नवरात्र शक्ति साधना और मां भगवती की आराधना का पावन पर्व हैं। इन नौ दिनों में प्रातः स्नान कर कलश स्थापना, अखंड दीप प्रज्वलित करना, दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ, माता को लाल पुष्प, चुनरी, फल और नैवेद्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। कन्या पूजन और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं दक्षिणा का दान भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

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