हत्या के मुकदमे में एएसपी, थानाध्यक्ष को नोटिस


फर्रुखाबाद। वर्ष 2008 से लंबित हत्या के एक मामले में गवाहों की लगातार गैरहाजिरी और न्यायालय के आदेशों का पालन न होने पर अपर सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। थानाध्यक्ष शमसाबाद, अपर पुलिस अधीक्षक (नोडल अधिकारी) और पैरोकार मुख्य आरक्षी से स्पष्टीकरण तलब करते हुए अदालत ने चेतावनी दी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-1 अभिनितम उपाध्याय की अदालत में हत्या के मामले में सुनवाई शेष अभियोजन साक्ष्य के लिए निर्धारित थी। अभियुक्त वेदपाल, अरविंद और भूरा अदालत में उपस्थित रहे लेकिन अभियोजन का कोई भी गवाह पेश नहीं हुआ। अदालत ने पाया कि गवाह शिव कुमार और रामशंकर के विरुद्ध 10-10 हजार रुपये के जमानती वारंट तथा अन्य गवाहों के सम्मन पहले ही जारी किए जा चुके थे, फिर भी उनकी तामील रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई। थाना शमसाबाद के पैरोकार मुख्य आरक्षी राजेश कुमार भी बार-बार बुलाने के बाद दोपहर करीब तीन बजे अदालत पहुंचे। उन्होंने केवल इतना बताया कि अगली तिथि पर विवेचक का बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराया जाएगा लेकिन गवाहों के तामील के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 23 मई 2026 को ही प्रभारी निरीक्षक शमसाबाद को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए थे। आदेश की प्रति अपर पुलिस अधीक्षक (नोडल अधिकारी) को भी भेजी गई थी। इसके बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि वर्ष 2008 से लंबित यह मुकदमा वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान में शामिल है, फिर भी पुलिस अधिकारियों की उदासीनता न्यायिक प्रक्रिया में बाधा बन रही है।
अदालत ने थानाध्यक्ष शमसाबाद, एएसपी (नोडल अधिकारी) और पैरोकार मुख्य आरक्षी से अगली तिथि तक लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। गवाह शिव कुमार और रामशंकर के विरुद्ध पुनः 10-10 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को शेष अभियोजन साक्ष्य के लिए नियत की है।

Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form